एक उम्मीद सी है बस_____

मैं अपने ईश्वर में
विश्वास रखती हूं
और मेरा मन 
अक्सर कहता है कि
तुम एक दिन मुझसे
दोबारा मिलोगे
एक उम्मीद सी है
और उम्मीद कभी भी
छोड़नी नहीं चाहिए; है ना
उस दिन तुम्हारा 
अचानक से मुझसे
ऐसे ही बिना किसी बात के
मुझसे मुंह मोड़ना
बात कुछ समझ में नहीं आई 
तुम्हारा यूं चले जाना दूर 
फिर कभी वापस 
नहीं आने के लिए वो हमारी 
आखिरी मुलाकात तो
नहीं हो सकती; ना 
एक उम्मीद है कि 
हम फिर मिलेंगे ,और
उम्मीद कभी छोड़नी 
नहीं चाहिए ,है ना ! 
जैसे पृथ्वी अपनी संतुलन 
बनाए रखना जानती है 
और फिर लील लेती है 
कई जिंदगियां लेकिन
अपना संतुलन बिगड़ने 
नहीं देती शायद वही संतुलन 
तुमने भी बनाया होगा 
अपनी जिंदगी में 
लील ली मेरी खुशियां 
जो तुम्हारे दिल के रास्ते 
होकर गुजरती थी कभी 
जैसे तराजू में पड़े
एक पलड़े में वज़न 
ज्यादा होने से संतुलन
बिगड जाता है और 
दूसरे पलड़े से निकालते ही 
पलड़ा बराबर हो जाता हो ,
ठीक वैसे ही तुम्हारे रिश्ते
बराबर हो गए ! है ना
पर तुम्हीं बताओ भला
ऐसे विकट समय में 
इस महामारी से
अगर सब उबर भी जाएं
तो क्या तुम्हारी जिन्दगी 
पहले की तरह होगी
वैश्विक मंदी में मान लो
नौकरी ना रही तुम्हारी
तो क्या तुम फिर भी
इस शहर में अपना 
ठिकाना तलाशोगे या 
हो जाओगे आंखों से 
ओझल इस शहर से या 
अपने आप में मशगूल
सबसे होके दूर ? बोलो ना
 परन्तु मुझे उम्मीद है
ईश्वर में विश्वास रखती हूं 
और मेरा मन अक्सर 
कहता है कि तुम एक दिन
मुझसे दोबारा मिलोगे 
और उम्मीद कभी भी 
छोड़नी नहीं चाहिए; है ना........

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