दीदार तुम्हारा Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps September 30, 2019 कभी धङाम से , कभी धङाक करके, कभी हौले से तो कभी चुपचुपा के हर वो दरवाजे बंद कर देते हो तुम, जिधर से तुम्हारे दीदार की कोशिश रहती है मेरी , लेकिन क्या तुम्हें मालूम है? कि कुछ दरवाजों में सुराख भी हुआ करती है । Read more