यशोधरा फिर अकेली

सत्य की खोज में निकल पड़े
उस दिन सिद्धार्थ का अपनी
सोती हुई यशोधरा एवं राहुल
को अकेले छोड़ जाने के
निर्णय से तुम मर्माहत हुए थे
यशोधरा के अकेलेपन
के दर्द से पीड़ा होती थी
उसके परित्यक्ता कहलाने से
तुम्हें तकलीफ होती थी
कहा था ना तुमने कि ,
उसकी क्या गलती थी
तो अब तुम्हीं बोलो ना
एक सत्य; ना ,ना सही की खोज में
तुम भी निकल पड़े
फर्क बस इतना कि
सत्य का पता तुम्हें मालूम था
और तुम्हारे
सही ग़लत के इस निर्णय से
अनजान एक यशोधरा
आज फिर अकेली रह गई
उसके दर्द से क्यूं पीड़ा ना हुई तुम्हें?
बोलो
एक सत्य पर विजय पाकर
दूसरे सत्य से मुंह मोड़ना
क्या यही सत्य की खोज है ?
क्या यही तुम्हारी जीत है?

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